आस्था, परंपरा और स्वाद का संगम 9 नवंबर से शुरू होगा बक्सर पंचकोशी मेला
बक्सर। “माई बिसरी, भाई बिसरी, पंचकोशवा के लिट्टी-चोखा ना बिसरी” यही कहावत बक्सर की आस्था और परंपरा को जीवंत रखती है। इस वर्ष 2025 के मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष की पश्चिमी तिथि से यानी 9 नवंबर रविवार से प्रसिद्ध बक्सर धाम पंचकोशी मेला का शुभारंभ होगा। यह धार्मिक यात्रा बसाव मठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में आरंभ होकर 13 नवंबर को चरित्रवन में लिट्टी-चोखा महाप्रसाद के साथ संपन्न होगी। यात्रा की शुरुआत रामरेखा घाट से स्नान-पूजन के बाद अहिल्या धाम से होगी, जहां पहला पड़ाव रहेगा। दूसरे दिन यात्रा नदांव, तीसरे दिन भभुआ स्थित भार्गव सरोवर, चैथे दिन उद्दालक ऋषि के आश्रम और पांचवें दिन चरित्रवन में समाप्त होगी। हर पड़ाव पर श्रद्धालु विशेष प्रसाद जैसे खिचड़ी, चूड़ा-दही, सत्तू-मूली और अंत में प्रसिद्ध लिट्टी-चोखा का भोग लगाते हैं। माना जाता है कि प्रभु श्रीराम ने बक्सर प्रवास के दौरान इन्हीं पांच स्थानों पर रात्रि विश्राम किया था तब से यह पंचकोशी यात्रा निरंतर आस्था और परंपरा का प्रतीक बनी हुई है। लाखों श्रद्धालु दूर-दराज से पहुंचकर धर्म, संस्कृति और स्वाद का यह संगम देखते हैं।










