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कांट गांव में डैम तोड़ने का आरोप, जेके सीमेंट फैक्ट्री पर घमासान

ब्रह्मपुर। प्रखंड के कांट गांव स्थित जेके सीमेंट फैक्ट्री प्रबंधन पर मनमानी और पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन के गंभीर आरोपों ने अब तूल पकड़ लिया है। ग्रामीणों के अनुसार, फैक्ट्री द्वारा ‘सफाई’ के नाम पर दो महत्वपूर्ण जल संग्रहण डैम (चेक डैम) को तोड़ दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में जल संकट की स्थिति उत्पन्न हो गई है। बताया जाता है कि पहला डैम भोजपुर और बक्सर की सीमा पर स्थित नदी पर ‘भोजपुर भूमि संरक्षण विभाग’ द्वारा निर्मित था, जो सैकड़ों किसानों की सिंचाई का मुख्य आधार था। दूसरा डैम बक्सर जिले के भीतर स्थित था, जो खेती के साथ-साथ मवेशियों के लिए भी जल का प्रमुख स्रोत था। इन दोनों संरचनाओं के ध्वस्त होने से न केवल सरकारी संपत्ति को नुकसान हुआ है, बल्कि क्षेत्रीय जल संतुलन भी प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि फैक्ट्री प्रबंधन ने बिना किसी वैधानिक अनुमति के जेसीबी के माध्यम से इन डैमों को तोड़ा। इस कार्रवाई से प्राकृतिक जलधारा के प्रवाह में भी बाधा उत्पन्न हुई है, जिससे पर्यावरणीय असंतुलन की आशंका बढ़ गई है।

प्रशासन की भूमिका पर सवाल :-

पर्यावरण संरक्षण कार्यकर्ता शैलेश ओझा ने इस मामले को लेकर एक माह पूर्व जिलाधिकारी को लिखित शिकायत दी थी। बावजूद इसके अब तक न तो कोई जांच प्रारंभ हुई है और न ही संबंधित प्रबंधन पर कोई कार्रवाई की गई है। इससे प्रशासनिक निष्क्रियता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। शैलेश ओझा का कहना है कि यदि औद्योगिक इकाइयों को सरकारी संरचनाओं को नुकसान पहुंचाने की खुली छूट दी जाएगी, तो इसका दूरगामी दुष्प्रभाव पूरे क्षेत्र की पारिस्थितिकी और किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।

लोक शिकायत में पहुंचा मामला :-

प्रशासनिक स्तर पर अपेक्षित कार्रवाई न होने के कारण अब यह मामला ‘लोक शिकायत निवारण’ के तहत दर्ज कराया गया है। शिकायत में प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं: सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में फैक्ट्री प्रबंधन पर प्राथमिकी दर्ज की जाए। दोनों डैमों का पुनर्निर्माण फैक्ट्री प्रबंधन अपने खर्च पर कराए। नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।

नजरें अब प्रशासनिक कार्रवाई पर :-

यह मामला अब जिले में व्यापक चर्चा का विषय बन चुका है। स्थानीय लोगों की निगाहें आगामी सुनवाई पर टिकी हैं, जहां यह स्पष्ट होगा कि प्रशासन इस मामले में ठोस कार्रवाई करता है या यह मुद्दा भी अन्य मामलों की तरह लंबित रह जाता है।

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