गोसाईंपुर भागवत कथा दूसरे दिन आचार्य रणधीर ओझा ने सुनाए द्रौपदी और परीक्षित प्रसंग
बक्सर। जिले के गोसाईंपुर ग्राम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति रही। मामाजी के कृपापात्र आचार्य रणधीर ओझा ने द्रौपदी की लाज रक्षा, उत्तरा की रक्षा तथा परीक्षित के जन्म और श्राप प्रसंग का दिव्य व भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के आरंभ में उन्होंने भागवत को आत्मोद्धार का मार्ग बताते हुए कहा कि यह भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम है तथा प्रत्येक प्रसंग मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक है। द्रौपदी प्रसंग में उन्होंने कहा कि जब द्रौपदी ने पूर्ण श्रद्धा से कृष्ण को पुकारा, तब भगवान ने उसकी लाज की रक्षा की। महाभारत युद्ध के बाद अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से गर्भस्थ बालक को बचाकर भगवान ने परीक्षित को जीवनदान दिया। आगे चलकर श्रापवश परीक्षित ने सात दिनों तक शुकदेव से भागवत श्रवण कर मोक्ष प्राप्त किया। कथा के दौरान “जय श्रीकृष्ण” व “राधे-राधे” के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना।










