नया बाजार आश्रम में संतों ने भजनों से जीवंत की पूज्य मामाजी महाराज की स्मृतियाँ
बक्सर। भगवान विश्वामित्र की तपोभूमि और गंगा की लहरों से सिंचित नया बाजार आश्रम में श्री सीताराम विवाह महोत्सव के अंतर्गत कथा वाचन का अद्भुत आयोजन हुआ। आचार्य रत्नेश ठाकुर जी ने कथा के सार में बताया कि ब्रह्मा जी की सृष्टि रचना से लेकर मनु-शतरूपा के आदर्श दांपत्य तक, सब ईश्वर की प्रसन्नता का ही स्वरूप है। कथा के दौरान अनन्य शरणागति और अटूट विश्वास को श्रेष्ठ गृहस्थ जीवन का आधार बताया गया। आचार्य ने कहा कि मन ही बंधन और मोक्ष का कारण है; जिस दिन हम सब कुछ ठाकुर जी का मान लेते हैं, उसी दिन समस्त भय समाप्त हो जाते हैं। ध्रुव-प्रहलाद के प्रसंगों के माध्यम से भक्ति की शक्ति को रेखांकित किया गया। इससे पूर्व, मंदिर में महंत राजाराम शरण जी महाराज के सानिध्य में पूज्य मामाजी महाराज का षोडशोपचार पूजन व श्रृंगार किया गया। संतों ने भजनों के माध्यम से मामाजी महाराज की स्मृतियों को जीवंत किया।










