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पूर्व विधायक के आरोपों को प्रदीप राय ने बताया बेबुनियाद, दी फॉरेंसिक जांच की चुनौती

बक्सर। डुमरांव के पूर्व विधायक अजीत कुशवाहा द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रदीप राय ने विस्तृत बयान जारी कर उन्हें बेबुनियाद, भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। उन्होंने कहा कि ये आरोप जनता को गुमराह करने और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं। प्रदीप राय ने स्पष्ट किया कि 25 मई 2011 को पावर ऑफ अटॉर्नी (मुख्तारनामा) के माध्यम से सुदामा उपाध्याय, ललन उपाध्याय, विजय कुमार उपाध्याय एवं उनकी माता शिवपुजनी देवी ने अपनी पैतृक खाता व प्लॉट की भूमि की बिक्री का अधिकार अखिलेश राय को दिया था, जो रजिस्ट्री कार्यालय बक्सर में दर्ज है। उन्होंने बताया कि इसी मुख्तारनामा के आधार पर 7 जून 2011 और 4 नवंबर 2016 को उनके नाम कबाला हुआ, जिसका दाखिल-खारिज और नामांतरण कानूनी रूप से पूर्ण हुआ। हस्ताक्षर व अंगूठे के निशान से जुड़े आरोपों को उन्होंने निराधार बताते हुए फॉरेंसिक जांच की चुनौती दी। प्रदीप राय ने कहा कि दाखिल-खारिज अपील वाद 114/2021-22, पुनरीक्षण वाद 143/2022-23, धारा 144 का आदेश 31 जनवरी 2025, टीएस 390/2021 और कंप्लेंट केस 331/2023 में उन्हें दोषी नहीं ठहराया गया है। रजनीकांत उपाध्याय का टाइटल सूट 382/2020 अभी लंबित है, जिसमें कोई अंतिम आदेश नहीं है। उन्होंने कहा कि अवैध कब्जे के आरोप भी गलत हैं। अतः प्रदीप राय ने मीडिया एवं आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी भ्रामक प्रचार पर विश्वास न करें और सत्य को तथ्यों के आधार पर ही परखें।

 

 

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