भाकपा (माले) के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने प्रदीप राय पर अवैध कब्जे व जाली दस्तावेज का आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच व कार्रवाई की मांग की
भाजपा नेता प्रदीप राय ने डॉ. अजीत कुशवाहा के आरोपों को राजनीति करार दिया, आमने-सामने दस्तावेज जांचने की चुनौती
बक्सर। सोमवार को भाकपा (माले) के पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुमार सिंह ने जिला प्रशासन से मांग की है कि भाजपा नेता प्रदीप कुमार राय द्वारा डुमरांव के सुदामा उपाध्याय की पुश्तैनी जमीन पर अवैध कब्जा और जाली दस्तावेज़ के आधार पर निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाए। आरोप है कि खाता संख्या 71/42, प्लॉट संख्या 321/938 की 6 कट्ठा भूमि पर 2016 में मृत मां के नाम से फर्जी स्वीकृति पत्र बनाकर कब्जा किया गया। सिविल कोर्ट में 467 व 471 धाराओं के तहत मामला दर्ज होने के बाद भी कब्जा जारी है और परिवार को लगातार धमकियाँ मिल रही हैं। इसी प्रकार सोहनिपट्टी निवासी राजनकांत उपाध्याय की 17 कट्ठा जमीन भी प्रदीप राय द्वारा जबरन ओपन बिरला माइंड स्कूल में कब्जा कर ली गई है। डॉ. अजीत कुमार सिंह ने कहा कि यह मामला भूमाफियाओं के बढ़ते दुस्साहस और प्रशासन की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और भूमि-राजस्व मंत्री से तुरंत हस्तक्षेप और पीड़ितों को सुरक्षा देने की मांग की है।
वही नया बस स्टैंड बाइपास रोड की भूमि विवाद को लेकर भाजपा नेता प्रदीप राय ने पूर्व विधायक डॉ. अजीत कुशवाहा द्वारा लगाए गए आरोपों को राजनीतिक साजिश करार देते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि वे इस समय बक्सर से बाहर हैं और इसी का फायदा उठाकर उनके खिलाफ बेबुनियाद प्रेस विज्ञप्ति जारी की जा रही है। प्रदीप राय ने स्पष्ट किया कि संबंधित जमीन के सभी दस्तावेज वैध और नियमसंगत हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी को आपत्ति है तो वह न्यायालय का रास्ता अपनाए, मीडिया ट्रायल से मामले का समाधान नहीं होगा। उन्होंने पूर्व विधायक पर आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव हारने के बाद वे बौखलाहट में अनर्गल आरोप लगा रहे हैं और जमीन के कारोबार में सक्रिय हैं। प्रदीप राय ने डॉ. अजीत कुशवाहा को चुनौती देते हुए कहा कि मीडिया में बयानबाजी करने से बेहतर है कि वे आमने-सामने बैठकर जमीन के दस्तावेजों की जांच करें। उन्होंने कहा कि किसी भी अवैध कब्जा, जालसाजी या जबरन निर्माण में उनका कोई संबंध नहीं है। प्रदीप राय ने मीडिया से निष्पक्ष जांच की अपील की और भरोसा जताया कि न्यायालय में सत्य सामने आने पर सभी आरोप स्वतः समाप्त हो जाएंगे। मामले की अंतिम निर्णय अदालत द्वारा ही किया जाएगा।











