सरस्वती विद्या मंदिर अहिरौली में श्रद्धा व उत्साह से मनी स्वामी विवेकानंद जयंती
बक्सर। सरस्वती विद्या मंदिर, अहिरौली, बक्सर के विशाल केशव सभागार में स्वामी विवेकानंद की जयंती श्रद्धा एवं उत्साह के साथ मनाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत स्वामी विवेकानंद के तेलचित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं पुष्पार्चन से हुई। इस अवसर पर उपस्थित भैया-बहनों, आचार्यों तथा भोजपुर विभाग के विभाग प्रमुख लालबाबू प्रसाद ने स्वामी विवेकानंद के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी, ओजस्वी वक्ता, महान अध्यात्मवादी एवं नवजागरण के अग्रदूत थे। उनका जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता में हुआ था। बाल्यावस्था से ही धार्मिक वातावरण और माता द्वारा सुनाई गई रामायण-महाभारत की कथाओं ने उन्हें चिंतनशील, कर्मनिष्ठ एवं राष्ट्रनिष्ठ बनाया। 11 सितंबर 1893 को शिकागो में विश्व धर्म संसद में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने भारत की आध्यात्मिक परंपरा को विश्व पटल पर गौरवान्वित किया। कार्यक्रम में विद्यालय के कई पूर्व छात्रों की भी सहभागिता रही। समारोह में विभाग प्रमुख लालबाबू प्रसाद, प्रधानाचार्य मनोरंजन कुमार, आचार्य मदन पाण्डेय, अनुप चैबे, ईश्वरचन्द्र, जनार्दन तिवारी, धीरेन्द्र कुमार सिंह, हेमशंकर साह, अखिलेश राय, दिनेश शर्मा, विवेक राय, ब्रजेश राय सहित सभी आचार्यगण एवं भैया-बहन उपस्थित रहे।










