महंत उत्तराधिकार विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, श्यामा दास को मिली अस्थायी मान्यता
बक्सर। पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीश खातिम रजा द्वारा 12 मई 2028 को विवाद अपील संख्या 539/2023 (महत चद्रमा दास बनाम बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड एवं अन्य) में पारित महत्वपूर्ण मौखिक आदेश के संदर्भ में बिहार राज्य धार्मिक न्यास परिषद् पटना ने अपना आधिकारिक वक्तव्य जारी किया है। परिषद के अनुसार महत चंद्रमा दास का निधन 25 दिसंबर 2025 को हो चुका है। उनके स्थान पर महंत श्यामा दास उर्फ सच्चिदानंद पाठक को कानूनी प्रतिनिधि के रूप में प्रतिस्थापित करने हेतु अंतरिम आवेदन दायर किया गया था। परिषद की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गणपति त्रिवेदी ने न्यायालय के समक्ष स्पष्ट रूप से कहा कि मृतक महत चंद्रमा दास ने श्यामा दास उर्फ सच्चिदानंद पाठक को अपना कानूनी प्रतिनिधि अथवा महंत / उत्तराधिकारी के रूप में नामांकित करने संबंधी कोई सूचना परिषद को नहीं दी थी। परिषद ने यह भी तर्क रखा कि बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड अधिनियम की धारा 28 (2) (एस) के तहत बिना वैध नामांकन के किसी व्यक्ति को महंत का कानूनी उत्तराधिकारी नहीं माना जा सकता। साथ ही प्रस्तावित व्यक्ति का दावा सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 2 (11) के अनुसार भी विधिसम्मत रूप से स्थापित नहीं है। न्यायालय ने दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद अपील की सुनवाई जारी रखने के उद्देश्य से महत श्यामा दास उर्फ सच्चिदानंद पाठक का नाम अस्थायी रूप से (प्रो टेम) प्रतिस्थापित करने की अनुमति प्रदान की है। साथ ही कार्यालय को निर्देश दिया गया है कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद सभी संबंधित अंतरिम आवेदनों को उचित शीर्षक के अंतर्गत प्रस्तुत किया जाए। परिषद ने स्पष्ट किया है कि महंत पद एक पवित्र धार्मिक एवं प्रशासनिक पद है तथा इसके उत्तराधिकार की प्रक्रिया पूर्णतः कानून एवं परिषद की नियमावली के अनुरूप ही मान्य होगी। I










