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बक्सर में पेड़ों की कटाई पर उठे सवाल, श्मशान मोड़ का वायरल वीडियो बना चर्चा का विषय

बक्सर। एक तरफ जब-जब गर्मी का मौसम आता है, बक्सर में भीषण गर्मी पड़ती है और यह गर्मी पिछले सात-आठ सालों में और ज्यादा भयंकर देखने को मिल रही है। वजह साफ है कि बक्सर-आरा एनएचआई पर जितने भी पेड़ लगे हुए थे, सभी पेड़ों को सड़क बनाने के नाम पर काट दिया गया। यही हाल अभी बक्सर में बन रही नई सड़कों में भी देखने को मिल रहा है। अभी जिले में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि परसों रात बक्सर के श्मशान मोड़ के पास एक हरे (जीवित) पेड़ को काटकर गायब कर दिया गया। बताया जा रहा है कि देर रात करीब 2-3 बजे इस पेड़ को गिराया गया। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यह पेड़ किसी निर्माण कार्य में बाधा बन रहा था, जिसके कारण इसे हटाया गया। हालांकि, इस कार्रवाई के लिए संबंधित विभाग से अनुमति ली गई थी या नहीं, इसको लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारी के अनुसार, भारत में बिना अनुमति हरा पेड़ काटना कानूनन अपराध है। इसके लिए सामान्य रूप से भारतीय वन अधिनियम, 1927 तथा राज्य के ट्री प्रोटेक्शन/प्रिजर्वेशन एक्ट के तहत प्रावधान लागू होते हैं। किसी भी पेड़ को काटने से पहले फॉरेस्ट डिपार्टमेंट या नगर निकाय से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। कई स्थानों पर इसके लिए ट्री ऑफिसर या फॉरेस्ट ऑफिसर की लिखित स्वीकृति जरूरी होती है। नियमों के अनुसार बिना अनुमति पेड़ काटने पर 5,000 से 50,000 रुपये या उससे अधिक का जुर्माना लगाया जा सकता है। इसके अलावा 6 महीने से 2 साल तक की सजा का भी प्रावधान है। कई मामलों में दोषी को काटे गए पेड़ के बदले नए पेड़ लगाने का निर्देश भी दिया जाता है। यदि पेड़ संरक्षित क्षेत्र या वन भूमि में आता है तो सजा और भी कड़ी हो सकती है। शहरी क्षेत्रों में भी बिना अनुमति पेड़ काटना अपराध की श्रेणी में आता है। अब इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।

 

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