तुलसी आश्रम में मकर संक्रांति पर गोस्वामी तुलसीदास को चूड़ा-दही का भोग
बक्सर। जिला अंतर्गत रघुनाथपुर स्थित तुलसी आश्रम में मकर संक्रांति के अवसर पर परंपरागत श्रद्धा के साथ गोस्वामी तुलसीदास को चूड़ा-दही का भोग अर्पित किया गया। मान्यता है कि गोस्वामी तुलसीदास ने इसी स्थान पर मकर संक्रांति के दिन चूड़ा-दही का प्रसाद ग्रहण किया था। परंपरा के अनुसार ग्रामीणों ने मुआर धान से बना चूड़ा और दही श्रद्धापूर्वक अर्पित किया। किंवदंती के अनुसार, गोस्वामी तुलसीदास रघुनाथपुर में प्रवास के दौरान गांव वालों की भक्ति और आतिथ्य से अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने यहीं रहकर ग्रामीणों को रामकथा सुनाई और प्रभु श्रीराम के प्रति लोगों की आस्था देखकर गांव का नाम बेला और पटवत से बदलकर रघुनाथपुर रखा। बिहार सरकार द्वारा प्रकाशित शाहाबाद गजेटियर 1966 में भी तुलसीदास के इस प्रवास का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि तुलसीदास ने यहां रामचरित मानस के उत्तरकांड के कुछ अंशों की रचना की थी। आज भी तुलसीदास के नाम से 4 एकड़ 63 डिसमिल भूमि दर्ज है। इस ऐतिहासिक स्थल को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग तेज हो गई है।










