महाराज चंद्र विजय सिंह के निधन पर चैम्बर ऑफ कॉमर्स ने किया शोक प्रगट
बक्सर। विश्व नदी दिवस के शुभ अवसर पर बाबा ब्रह्मेश्वरनाथ धाम ब्रह्मपुर बक्सर स्तिथ शिवगंगा सरोवर पर गंगा समग्र के स्थानीय स्वयंसेवकों के द्वारा विचार-गोष्ठी, गंगा गीत व शिवगंगा सरोवर पर आरती कर नदियों और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए संकल्प लिया गया। साथ ही समाज को इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया गया। इस अवसर पर गंगा समग्र दक्षिण बिहार प्रान्त संयोजक सह राष्ट्रीय आरती आयाम प्रमुख शम्भू नाथ पांडेय,विभाग सेवा प्रमुख शिवजी पांडेय, बक्सर जिला बौद्धिक प्रमुख कन्हैया दुबे, पूर्व प्रचारक अजित दुबे, खण्ड कार्यवाह राजू पांडेय, हरेराम सिंह, नित्या नन्द ओझा, ओंकार पांडेय, शिव गोपाल पांडेय, रामनिवास वर्मा उपस्तिथ रहे। आरती स्थानीय पुरोहित मुनी जी पांडेय व शदानन्द पांडेय द्वारा किया गया।शम्भू नाथ पांडेय ने बताया कि नदियाँ केवल जलधारा नहीं हैं, बल्कि जीवन की धारा हैं। भारत ही नहीं, तो संपूर्ण विश्व में सभ्यताओं का विकास नदियों के किनारे ही हुआ है। सभ्यता नील नदी के किनारे फली-फूली।मेसोपोटामिया की सभ्यता टाइग्रिस और यूफ्रेटिस नदी पर आधारित रही। हरिद्वार, प्रयागराज, वाराणसी जैसे तीर्थस्थल नदियों के कारण आध्यात्मिक केंद्र बने। कबीर, तुलसी सूरदास और रविदास जैसे सन्तों की साधना भी नदियों के तट हुई। हमारे पर्व माघ मेला,छठ पर्व सब नदियों से जुड़े हैं। भारत की सिंधु और गंगा घाटी सभ्यता विश्व की प्राचीनतम सभ्यताओं में गिनी जाती है। गंगा, यमुना, सिन्थु, गोदावरी, नर्मदा, कावेरी आदि – हमारी संस्कृति में “माँ” के रूप में पूजित हैं। 2005 से कनाडा से विश्व नदियां दिवस की शुरुआत हुई। इसे 100 से अधिक देशों में मनाया जाता है। यूनेस्को के अनुसार 80 प्रतिशत से अधिक अपशिष्ट जल बिना शोधन के नदियों में डाला जाता है। शिवजी पांडेय ने गंगा समग्र के कार्यकर्ताओं द्वारा किये जा रहे ऐसे कार्यो की सराहना की। इस अवसर पर गंगा समग्र के स्वयंसेवक डमरू पांडेय, संतोष ओझा, सुरेन्द्र यादव, शिवशंकर यादव आदि उपस्तिथ रहे।










