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धार्मिक

आस्था और परंपरा का संगम बक्सर पंचकोशी मेला अहिल्या धाम से हुआ आरंभ

बक्सर। “माई बिसरी, भाई बिसरी, पंचकोशवा के लिट्टी-चोखा ना बिसरी” यही कहावत बक्सर की आस्था और परंपरा को जीवंत रखती है। इस वर्ष 2025 के मार्गशीर्ष (अगहन) कृष्ण पक्ष की पश्चिमी तिथि से यानी 9 नवंबर रविवार से प्रसिद्ध बक्सर धाम पंचकोशी मेला का शुभारंभ हुआ। यह धार्मिक यात्रा बसाव मठाधीश्वर श्री अच्युत प्रपन्नाचार्य जी महाराज के नेतृत्व में आरंभ होकर 13 नवंबर को चरित्रवन में लिट्टी-चोखा महाप्रसाद के साथ संपन्न होगी। यात्रा की शुरुआत रामरेखा घाट से स्नान-पूजन के बाद अहिल्या धाम से होगी, जहां पहला पड़ाव रहा। यह ऐसा स्थल है जहां पुराणों मे वर्णन है कि अहिल्या धाम में महर्षि गौतम ऋषि रहा करते थे और उनके ही श्राप से उनकी पत्नी माता अहिल्या पत्थर बन गई थी जब प्रभू श्रीराम चन्द्र जी इस व्याघ्रसर में पधारे थे तो पंचकोशी यात्रा के प्रथम पणाव में माता का उधार किए तबसे यहां पचकोशी परिक्रमा के दिन से माता जहा विराजमान है उस भव्य मंदिर में हजारों की संख्या में माताएं बहने सुबह से पहुंचकर देर शाम तक दीपक जलाती है और पूजन करती है। वही अहिरौली मठ में मठाधीश्वर के नेतृत्व में संत पूजन भी हुआ। दूसरे दिन यात्रा नदांव पहुंचती है जहां नारद ऋषि के आश्रम के नजदीक पोखरे पर खिचड़ी रूपी प्रसाद ग्रहण किया जाता है। तीसरे दिन भभुहर स्थित भार्गव सरोवर के नजदीक पड़ाव पहुंचता है वहां दही चुड़ा रूपी प्रसाद ग्रहण किया जाता है। चैथे दिन उद्दालक ऋषि के आश्रम में पहुचकर सतू-मूली प्रसाद ग्रहण किया जाता है और पांचवें दिन चरित्रवन में प्रसिद्ध लिट्टी-चोखा व्यंजन का प्रसाद भक्तजन ग्रहण करते है।

प्रथम पड़ाव अहिरौली में साधु संत

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